नेशनल अवार्ड पाने वाले इस एक्टर का घर दीखता है ऐसा, आज भी बनता है मिट्टी के चूल्हे पर खाना

मुंबई: बॉलीवुड की दुनिया बहुत ही अजीब दुनिया है। यहाँ आपको तरह-तरह के लोग देखने को मिल जायेंगे। इस दुनिया में हर बैकग्राउंड के लोग देखने को मिलते हैं। यानी कोई स्टार परिवार से होता है तो कोई साधारण परिवार से होता है, जिसका कोई फ़िल्मी बैकग्राउंड नहीं होता है। बॉलीवुड की चमक-धमक देखकर हर कोई इसकी तरफ आकर्षित हो जाता है। कई लोग इसी आकर्षण की वजह से अपना सबकुछ छोड़कर बॉलीवुड में अपना कैरियर बनाने के लिए चले जाते हैं।

इनमें से कुछ कामयाब हो जाते हैं तो कुछ गुमनामी में खो जाते हैं। इन्ही में से कुछ ऐसे भी होते हैं जो इतिहास रच देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं,

जिन्होंने अपनी एक्टिंग से सबको अपना दीवाना बना दिया है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी के बारे में। फिल्मों में विशेष योगदान के लिए 65वें नेशनल अवार्ड 2018 की घोषणा हो गयी है। पंकज त्रिपाठी को न्यूटन फिल्म के लिए स्पेशल अवार्ड दिया गया है।


आपकी जानकारी के लिए बता दें पंकज बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। जब भी इन्हें मौका मिलता है अपने गाँव जाते रहते हैं। आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि पंजक त्रिपाठी बॉलीवुड के मशहूर एक्टर हैं, लेकिन आज भी इनके घर पर मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनता है। पंकज त्रिपाठी गोपालगंज के बेलसंड गाँव के रहने वाले हैं।

पंकज एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गाँव में उनके माता-पिता और कुछ रिलेटिव्स रहते हैं। पंकज त्रिपाठी के पिता का नाम पंडित बनारस त्रिपाठी है और माता का नाम हेमंती देवी है। जब भी इन्हें फिल्मों से फुर्सत मिलती है, यह मुंबई से अपने गाँव आ जाते हैं।


पंकज ने अपने बारे में बताया कि आज भी उनके गाँव में पक्की सड़क नहीं है। गाँव से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक सिनेमा हॉल है। पंकज ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि कुछ दिनों पहले तक उनके घर पर टीवी भी नहीं था। जब पंकज 10वीं में पढ़ रहे थे, तो उन्हें यह भी नहीं पता था कि फ़िल्में क्या होती हैं। 11वीं कक्षा तक वो खुद खेतों में काम करते थे। अपने बचपन के दिनों में छठ मेला के दौरान होने वाले नाटक में वो लड़की बनते थे। लोग उनका हौसला बढाने के लिए तालियाँ भी बजाते थे। ये सब पंकज को अच्छा लगता था। उसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न एक्टिंग में ही अपना कैरियर बनाया जाये।

लेकिन उनके सामने एक समस्या यह थी कि ये सब पिताजी को कैसे बताया जाये। एक दिन हिम्मत करके उन्होंने अपने मन की बात पिताजी को बता दी।

पिताजी ने उनका फैसला सुनकर बस यही कहा कि कमा-खा लोगे ना? उसके बाद पंकज दिल्ली एनएसडी पहुँच गए। यहाँ उन्होंने एडमिशन तो ले लिया लेकिन जब वो क्लास में गए तो वहां सबको अंग्रेजी बोलते देखकर हैरान रह गए।

पहले तो उन्हें लगा कि एक्टिंग छोड़ देनी चाहिए। लेकिन जब क्लास में एक्टिंग की और लोगों ने तारीफ की तो उन्हें अच्छा लगा। इसके बाद से वो लगातार अपने काम में लगे रहे। पंकज ने बॉलीवुड की फुकरे, मशान, रन, गैंग ऑफ वासेपुर, ओंकारा, गुंडे, मंजिल, ग्लोबल बाबा, नील बटा सन्नाटा, धर्म और मांझी द माउंटेन मैन जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में एक्टिंग की है।

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